Sunday, April 4, 2010

राहु-केतु

लाल किताब के मुताबिक राहु केतु दोनों पापी ग्रह हैं । राहु खुफिया पाप तो केतु ज़ाहिरा पाप है। सूरज डूबने के बाद शाम मगर शनि की रात शुरू होने से पहले का वक्त राहु और रात खत्म होने के बाद सुबह मगर सूरज निकलने से पहले का वक्त केतु है। राहु सिर का साया तो केतु सिर के बिना धड़ (जिस्म) का साया है। लेकिन इन्सानी जिस्म में नाभि के ऊपर सिर की तरफ का हिस्सा राहु का राज्य और नाभि के नीचे पांव की तरफ के हिस्से पर केतु का राज होगा। राहु कुंडली के खाना नं0 12 में आसमानी हद बृहस्पाति के साथ मुकर्र हुआ तो केतु खाना नं0 6 पाताल के बुध का साथी हुआ। दोनों की मुश्तरका बैठक कुंडली का खाना नं0 2 है। दोनों के बाहम मिलने की जगह शारा आम यानि जिस जगह दो तरफ से आकर रास्ता बन्द हो जाता हो, वहां दोनों ग्रहों का ज़रूर मंदा असर या दोनों मन्दे या पाप की वारदातें या नाहक तोहमत और बदनामी के वाक्यात या ग्रहस्थी के बेगुनाह धक्के लग रहे होंगे। लाल किताब के मुताबिक:-

'' केतु कुत्ता हो पापी घड़ी का, चाबी राहु जा बनता हो।

चन्द्र सूरज से भेद हो खुलता, ज़ेर शनि दो होता हो ॥''

राहु केतु हमेशा बुध (घड़ी) के दायरे में घूमते हैं। अगर यह देखना हो कि राहु कैसा है तो चन्द्र का उपाय करें यानि खालिस चांदी का टुकड़ा अपने पास रखें और केतु की नीयत का पता लगाने के लिये सूरज का उपायें करें यानि सुर्ख तांबा अपने पास रखें । इस तरह दोनों ग्रहों का दिली पाप खुद व खुद पकड़ा जायेगा। यानि उस ग्रह के ताल्लुक के वाक्यात होने लगेगें। राहु और केतु में से अगर कोई भी खाना नं0 8 में हो तो शनि भी उस वक्त खाना नं0 8 में गिना जायेगा। यानि जैसा शनि वैसा ही फैसला समझा जायेगा। अगर राहु केतु दोनों खराब असर करना शुरू कर दें तो राहु 42 साल और केतु 48 साल तक और दोनो मुश्तरका 45 साल का मन्दा असर कर सकतें हैं। कुंडली में सूरज राहु मुश्तरका से सूरज ग्रहण और चन्द्र केतु मुश्तरका से चन्द्र ग्रहण होगा। लिहाज़ा ग्रहण से राहु केतु के मन्दे असर का ज़माना लम्बा हो सकता है। जिसके लिये ग्रहण के वक्त और वैसे भी पापी ग्रहों की चीज़ें (नारियल वगैरह) चलते पानी (दरिया या नदी) में बहाते रहना मददगार होगा।

राहु:- रहनुमाए गरीबां मुसाफिरां ।

मस्त हाथी ज़िन्दा (नीच) कीमत एक लाख, मुर्दा (उच्च) सवा लाख ।

दुनियां के फर्ज़ी अन्देशे की सोच विचार और जागते हुये ही इन्सानी दिमाग में ख्वाबी लहर और क्यासी ख्यालात की नकल व हरकत का 42 साला उम्र का ज़माना राहु का अहद है। सब कुछ होते हुये कुछ भी न होना राहु शरीफ़ की असलियत है। दिमागी लहर का मालिक सब दुश्मनों से बचाव और उनका नाश करने वाला माना गया है। उत्ताम असर के वक्त चोट लगने से नीला रंग हो चुके जिस्म को फूंक से ही तन्दरूस्त करने वाला मानिंद हाथी मगर सफेद रंग का । राहु जिसकी मदद पर हो जाये कुल दुनिया का सिर उसके सामने झुक जाये। कुंडली में अगर मंगल शनि मुश्तरका या राहु अकेला खाना नं0 4 में या चन्द्र उत्ताम हो या मंगल खाना नं0 12 में हो तो राहु मन्दा असर न देगा। अगर राहु कुण्डली में शनि के बाद के घरों में बैठा हो तो शनि से हुकम लेकर काम करेगा। लेकिन जब शनि से पहले घरों में हो तो खुद हाकिम होगा और शनि को हुक्म देगा।

राहु मन्दे के वक्त इसका मन्दा असर राहु की कुल मियाद 42 साला उम्र के पूरा होने पर दूर होगा। फालतू धन दौलत, दुनियावी आराम व बरकत 42 के बाद फौरन बहाल हाेंगे। कड़कती हुई बिजली, भूचाल, आतिशी खेज़ मादा पाप की एजेन्सी में बदी का मालिक हर मन्दे काम में मौत का बहाना घड़ने वाली ताकत, ठगी, चोरी और अयारी का सरगना चोट मारके नीला रंग कर देने वाली गैबी लहर का नामी फ़रिशता कभी छिपा नही रहता। कुंडली में सूरज शुक्र मुश्तरका होंतो राहु अमूमन मन्दा असर देगा। अगर सूरज शनि मुश्तरका और मन्दे हों तो राहु नीच फल बल्कि मंगल भी मंगल बद ही होगा। अगर केतु पहले घरों में और राहु बाद के घरों में हो तो राहु का असर मन्दा और केतु सिफर होगा। अगर राहु अपने दुश्मन ग्रहों (सूरज, शुक्र, मंगल) को साथ लेकर केतु को देखे तो नर औलाद, केतु की चीज़ें, कारोबार या रिश्तेदार मतल्का केतु बर्बाद होंगे। सूरज की दृष्टि या साथ से राहु का असर न सिर्फ बैठा होने वाले घर पर मन्दा होगा बल्कि साथ लगता हुआ घर भी बर्बाद होगा। मन्दे राहु के वक्त दक्षिण के दरवाज़े का साथ न सिफ माली नुक्सान देगा बल्कि इसका ताकतवार हाथी भी मामली चींटी से मर जायेगा। मन्दे राहु के वक्त यानि जब बुखार, दुनियावी दुश्मन या अचानक उलझन पर उलझन खड़ी होती जाये तो:-

1. चांदी का उपाये मददगार जब दिल की शांति बरबाद हो रही हो।

2. मसूर की दाल सुर्ख रंग दली हुई, भंगी को सुबह देवें या वैसे ही भंगी को पैसे की खैरात करते रहें।

3. मरीज के वज़न के बराबर जौं (अनाज, कनक) चलते पानी में बहा देवें।

4. जौं रात को सिरहाने रखकर सुबह जानवरों या गरीबों में तकसीम करदें।

5. राज दरबार या व्यापार के आये दिन झगड़े और नुकसानों के वक्त अपने जिस्म के वज़न के बराबर कच्चे कोयले दरिया में बहाना मदद देगा।

केतु:- दरवेश आकबत अन्देश

दुनिया की आवाज़ दरगाह में पहुंचाने वाला दरवेश कुत्ता,

मौत के यम की आमद पहले बताये।

दुनियावी कारोबार के हल करने के लिये इधर उधर सलाह मशवरे के लिये दौड़ धूप का 48 साला उम्र का ज़माना केतु का दौर दौरा है। ज़र्द बृहस्पति, सुर्ख मंगल, अण्डे का रंग बुध तीनों ग्रहों का मजमुआ केतु तीनो ही ज़मानों का मालिक होगा। जान से मारने की बजाये आखिर कब्र तक (चारपाई, तख्ता) मदद होगा। केतु नेकी का फरिशता, सफर का मलिक और आखीर तक मदद देने वाला ग्रह है। केतु से मुराद सफेद व काला दो रंगा कुत्ता है। कुत्तिया का नर बच्चा जो एक ही पैदा हुआ हो, खानदानी नस्ल कायम कर जायेगा।

1. मन्दे केतु के वक्त अपनी कमज़ोरी दूसरों को बताना, दूसरों के आगे रोना और भी मन्दी मुसीबत देगा। बृहस्पति का उपाय मददगार होगा।

2. मन्दी सेहत के वक्त चन्द्र का उपाय मददगार मगर लड़का मन्दा हो तो धर्म स्थान में काला व सफेद कम्बल देना मुबारक होगा।

3. पांव या पेशाब की तकलीफ के वक्त पांवों के दोनों अगूंठों में खालिस रेशम का सफेद धागा बांधना या चांदी छल्ला डालना मददगार साबित होगा।

4. केतु की चारपाई भी मानी गई है। मगर ग्रहचाल में चूंकि केतु को शुक्र का फल माना है इसलिये चारपाई दरअसल वह जो शादी के वक्त दहेज में मामा या माता पिता की तरफ से लड़की को बतौर दान दी गई हो। ऐसी चारपाई को औलाद की पैदायश के लिये इस्तेमाल करना उत्ताम फल देगा चाहे केतु कुंडली में कितना भी नीच मन्दा या बर्बाद ही क्यों न हो। जब तक वह चारपाई घर में मौजूद और इस्तेमाल में रहे, केतु का फल कभी मन्दा ना होगा।

5. मन्दी हालत में केतु दुनिया का धोखेबाज छलावा होगा। जब तक बुध अच्छा, केतु बर्बाद ही होगा। केतु का मकान, बच्चे व औरत जात की हालत मन्दी ही रखेगा। बृहस्पति या सूरज जब दुश्मन ग्रहों से खुद ही मर रहे हों तो केतु बर्बाद होगा। केतु मन्दे के वक्त खासकर जब कुंडली में चन्द्र और शुक्र इकट्ठे हो रहे हों तो बच्चे का जिस्म सूखने लग जाता है। ऐसे वक्त में बच्चे के जिस्म पर दरिया, नदी, नाले की मिट्टी, मुलतानी मिट्टी या गाचनी मलकर खुश्क होने दें। जब कुछ अर्सा हो जाये तो बच्चे को मौसम के मुताबिक सर्द या गर्म पानी से नहलाकर साफ कर देवें। ऐसा 40-43 दिन लगातार करने से जिस्म का सूखना ठीक हो जायेगा।

1 comment:

jesal said...

केतु मन्दे के वक्त खासकर जब कुंडली में चन्द्र और शुक्र इकट्ठे हो रहे हों तो बच्चे का जिस्म सूखने लग जाता है। ऐसे वक्त में बच्चे के जिस्म पर दरिया, नदी, नाले की मिट्टी, मुलतानी मिट्टी या गाचनी मलकर खुश्क होने दें। जब कुछ अर्सा हो जाये तो बच्चे को मौसम के मुताबिक सर्द या गर्म पानी से नहलाकर साफ कर देवें। ऐसा 40-43 दिन लगातार
करने से जिस्म का सूखना ठीक हो जायेगा


thakurji jis taraha aapne yaha likha hai ki kundali mai sukra+chandra ekhate ho to bacche ka sarir sukne lag jata hai ..

meri kundali me bhi 4th house mai sukra+ketu+chandra ekhatee hai toh mera bachho par bhi iska aasar hoga kya ???

Post a Comment